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भगतसिंह की परिपक्वता नास्तिकता और देश भक्ति

 भगत सिंह आखिर थे कौन? ऐसा सवाल आने पर लोग एक नास्तिक  देशभक्त को स्मरण करते। हैं।  किंतु आपको बता दे ,जब उनकी मृत्यु हुई तब उनके जेब से गीता निकला इसका अर्थ यह है कि भगत सिंह नास्तिक थे एक ऐसे धर्म के जिस धर्म में गुलामी को यह कहकर सहन किया जाता है कि हिंसा अधर्म है। उन्होने ऐसे धर्म का त्याग किया जिसमे उन्हे सहन सिखाया गया । और उन्होंने  देशभक्ति को बड़ा धर्म माना अर्थात यह साबित होता है की तर्कशील नास्तिक हजार आस्तिक से बेहतर हैं,और ईश्वर प्राप्ति की ओर अग्रसर है ।

नास्तिकता क्या है।

 क्या आप जानते है नास्तिकता क्या है ।  नही न शायद आप लोग में से कुछ कहेंगे भगवान को न मानने वाले नास्तिक है ।किंतु ऐसा नहीं है वेदांत और ज्ञान कहता है ,जो व्यक्ति ऐसे धर्म को न माने जिस धर्म में ब्राम्हण और क्षत्रिय को पूजा जाता है,एवं शुद्र को पीटा जाता है उसके सम्मान का हनन केवल इसलिए कर दिया जाता है क्युकी वह शुद्र था।एवं गाय को चमड़  से बने ढोल को सम्मानपूर्वक रख दिया जाता है,जबकि गाय के चमड़े के साथ काम करने वाले मोची को अंदर तक आने नही दिया जाता अगर आप ऐसे धर्म का त्याग करते है ,तब आप एक सच्चे नास्तिक है ।और एक सच्चा नास्तिक ही ईश्वर को सर्वप्रथम प्राप्त करता है ।