भगतसिंह की परिपक्वता नास्तिकता और देश भक्ति
भगत सिंह आखिर थे कौन?
ऐसा सवाल आने पर लोग एक नास्तिक देशभक्त को स्मरण करते।
हैं।
किंतु आपको बता दे ,जब उनकी मृत्यु हुई तब उनके जेब से गीता निकला इसका अर्थ यह है कि भगत सिंह नास्तिक थे एक ऐसे धर्म के जिस धर्म में गुलामी को यह कहकर सहन किया जाता है कि हिंसा अधर्म है। उन्होने ऐसे धर्म का त्याग किया जिसमे उन्हे सहन सिखाया गया । और उन्होंने देशभक्ति को बड़ा धर्म माना अर्थात यह साबित होता है की तर्कशील नास्तिक हजार आस्तिक से बेहतर हैं,और ईश्वर प्राप्ति की ओर अग्रसर है ।
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