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क्या है प्रेम और क्या है वासना

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 अगर आपको कोई लड़की/लड़का सुंदर लगा इसलिए आपने प्रेम किया तो यह वासना हुआ । किंतु पहले आपको प्रेम हुआ फिर वह लड़की/लड़का सुंदर दिखा तो यह निश्चित ही प्रेम हुआ।   उसका जिस्म देखने के लिए तरस रहे हो तो यह वासना हुई। परंतु केवल उसे देखने के लिए तरस रहे हो तो यह प्रेम हुआ । उससे प्रेम करने के बाद उससे मन भर जाए तो यह वासना हुआ । पर प्रेम दिनो दिन बढ़ता गया तो यह निश्चित प्रेम हुआ । उसके बाद किसी और में मन लगे तो यह वासना हुई । किंतु उस एक से ही मन न भरे तो प्रेम हुआ।

कैसे बने प्रभावशाली वक्ता

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एक प्रभाव शाली वक्ता बनने के लिए दो चीजे बेहद आवश्यक होती है । 1.)इमोशनली अटैचमेंट  2.)दूसरा कम्युनिकेशन स्किल  अगर बात किया जाए प्रभावशाली वक्ताओं की तो हिटलर का नाम सबसे ऊपर आता है । क्युकी हिटलर ही वो सख्स थे जिन्होंने अपने जुबान के दम में वोट हासिल कर लिया जब वह बोलते थे ,तो पूरी भीड़ को कंट्रोल कर लेते थे । पूरी भीड़ को अपने इमोशन से कन्ट्रोल कर लेते थे । उन्हे भीड़ को कंट्रोप करने का तरीका पता था। वोट मांगते वक्त वो कहते थे-यदि आपको अपने देश से प्यार है ,अपने देश की सेना से प्यार है तो मुझे वोट दीजिए मेरा वादा है मैं इस देश को एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में प्रदर्शित करूंगा ऐसा सुनने पर ही आधे से ज्यादा भीड़ उनकी ओर आकर्षित हो जाती थी ,वो अपने भाषण को पूरे इमोशन से बोलते थे।जिससे सुन रहे लोग भी इमोशन से जुड़ जाते थे।  औ र फेस एक्सप्रेशन भी शानदार होना चाहिए जब हिटलर भीड़ को उत्साहित करना चाहते थे ,तब वह चेहरे पर ऐसे शानदार गुस्से से भरे एक्सप्रेशन देते थे ,और व्यापारी वर्ग के खिलाफ भड़काते थे।और इस तरह से झूठ बोलते थे की लोगो को यकीन करना पड़ता था ।

बुरा बनना है।

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बुरा बनना है। ऐसा सुनने पर लोग कहेंगे ये क्या बात हुई । लेकिन ये सच में आज के हिसाब से बेहद सही और सटीक जीवन जीने का उदाहरण है । आइए इसे कहानी से समझे । एक लड़का राम था । राम एक सीधा साधा लड़का था ,वह अपने जीवन को अनुशासन से जीना पसंद करता था ।उसे एक लड़की से प्यार हुआ ,लड़की का नाम श्रेया था । सब कुछ अच्छा चल रहा था ।राम श्रेया बेहद से प्यार करता था । वो श्रेया की हर बाते मानता था , हर समय उसके लिए उपलब्ध रहता था । सब कुछ ठीक चल रहा था । लेकिन अचानक श्रेया का प्यार राम के प्रति कम होने लगा ।रोज नए नए बात पर झगड़े होने लगे ,वही श्रेया को दूसरे लड़के पसंद आने लगे । दूसरो का फ्लर्ट करना उसे अच्छा लगने लगा । वह दूसरो के प्रति अट्रैक्ट होने लगी ।फिर उसने राम के साथ रिश्ता तोड़ दिया ,क्युकी अब राम उसे अच्छा नही लगने लगा था ।वह रॉकी नाम के एक लड़के के साथ रिलेशन में आ गई जो की एक बैड ब्वॉय था । जो की राम के  विपरीत था ,फिर भी श्रेया उसके साथ खुश थी और उसके साथ रहना पसंद करती थीं। जब राम को पता चला कि श्रेया किसी रॉकी नाम के बैड बॉय के साथ खुश है तो उसे यकीन नही हुआ वह फूट फूट कर रोने लगा...

क्यू आता है जीवन में संकट और दुख

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क्यू आता है ,जीवन में संकट और दुख ? अक्सर लोग दुख या संकट प्राप्त होने पर रोने या पागल से हो जाते है । किंतु अगर आप बड़े ज्ञानियों को पूछे की दुख किसलिए जरूरी है ,और क्यू आता है,तो उनका जवाब यही होगा ,,   दुख व्यक्ति को मजबूत करनें के लिए आता है । और एक कारण ये भी है, कि भगवान तुम्हे शायद ज्यादा देना चाहते है ।  अभी जो हो रहा है उससे बढ़के देना चाहते है ।इसलिए जब दुख आए तो सब्र कीजिए वक्त कब बदलेगा कोई नही जानता ।

कौनसा धर्म सही है।

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कौनसा धर्म सही है। ये सुनकर लोग अपने अपने समुदाय और धर्म को श्रेष्ठ बताएंगे । किंतु वेदांत कहता है ,धर्म वही श्रेष्ठ है जिसमे दूसरो से प्यार करना सिखाया जाता है , हिंदू मुस्लिम सिख,ईसाई ये धर्म नही है । धर्म का सही अर्थ है ,प्रेम,परोपकार त्याग ,ईमानदारी । यदि आपका धर्म आपको यह सब नही सिखाता तो ऐसे धर्म का त्याग ही सही है ।  एक नफरत भरे धर्म के आस्तिक होने से अच्छा उसका नास्तिक बन के लोगो से प्रेम करना । आज लोग धर्म को लेकर राजनीति करते है ,अपने आप को अपने धर्म के ज्ञानी और अनुयाई बताते है ,अगर आप देखे तो वो धर्म को गंदा करते है ,क्युकी दूसरे धर्म से या दूसरे समुदाय के लोगो से नफरत करना कभी धर्म नही होता । कट्टरता कभी धर्म नही बनता । धर्म का अर्थ है ड्यूटी और इसके अंतर्गत आता है प्रेम , त्याग ,ईमानदारी ,सेवा ।

भगतसिंह की परिपक्वता नास्तिकता और देश भक्ति

 भगत सिंह आखिर थे कौन? ऐसा सवाल आने पर लोग एक नास्तिक  देशभक्त को स्मरण करते। हैं।  किंतु आपको बता दे ,जब उनकी मृत्यु हुई तब उनके जेब से गीता निकला इसका अर्थ यह है कि भगत सिंह नास्तिक थे एक ऐसे धर्म के जिस धर्म में गुलामी को यह कहकर सहन किया जाता है कि हिंसा अधर्म है। उन्होने ऐसे धर्म का त्याग किया जिसमे उन्हे सहन सिखाया गया । और उन्होंने  देशभक्ति को बड़ा धर्म माना अर्थात यह साबित होता है की तर्कशील नास्तिक हजार आस्तिक से बेहतर हैं,और ईश्वर प्राप्ति की ओर अग्रसर है ।

नास्तिकता क्या है।

 क्या आप जानते है नास्तिकता क्या है ।  नही न शायद आप लोग में से कुछ कहेंगे भगवान को न मानने वाले नास्तिक है ।किंतु ऐसा नहीं है वेदांत और ज्ञान कहता है ,जो व्यक्ति ऐसे धर्म को न माने जिस धर्म में ब्राम्हण और क्षत्रिय को पूजा जाता है,एवं शुद्र को पीटा जाता है उसके सम्मान का हनन केवल इसलिए कर दिया जाता है क्युकी वह शुद्र था।एवं गाय को चमड़  से बने ढोल को सम्मानपूर्वक रख दिया जाता है,जबकि गाय के चमड़े के साथ काम करने वाले मोची को अंदर तक आने नही दिया जाता अगर आप ऐसे धर्म का त्याग करते है ,तब आप एक सच्चे नास्तिक है ।और एक सच्चा नास्तिक ही ईश्वर को सर्वप्रथम प्राप्त करता है ।