कौनसा धर्म सही है।
कौनसा धर्म सही है।
ये सुनकर लोग अपने अपने समुदाय और धर्म को श्रेष्ठ बताएंगे ।
किंतु वेदांत कहता है ,धर्म वही श्रेष्ठ है जिसमे दूसरो से प्यार करना सिखाया जाता है , हिंदू मुस्लिम सिख,ईसाई ये धर्म नही है । धर्म का सही अर्थ है ,प्रेम,परोपकार त्याग ,ईमानदारी । यदि आपका धर्म आपको यह सब नही सिखाता तो ऐसे धर्म का त्याग ही सही है ।
एक नफरत भरे धर्म के आस्तिक होने से अच्छा उसका नास्तिक बन के लोगो से प्रेम करना ।
आज लोग धर्म को लेकर राजनीति करते है ,अपने आप को अपने धर्म के ज्ञानी और अनुयाई बताते है ,अगर आप देखे तो वो धर्म को गंदा करते है ,क्युकी दूसरे धर्म से या दूसरे समुदाय के लोगो से नफरत करना कभी धर्म नही होता ।
कट्टरता कभी धर्म नही बनता । धर्म का अर्थ है ड्यूटी और इसके अंतर्गत आता है प्रेम , त्याग ,ईमानदारी ,सेवा ।


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